Dambhodbhava, Nara-Nārāyaṇa, and the Counsel to Abandon Hubris
Udyoga-parva 94
वैशम्पायन उवाच तद् वाक्यं पार्थिवा: सर्वे हृदयैः समपूजयन् । नतत्र कश्रनिद् वक्तुं हि वाचं प्राक्रामदग्रत:
वैशम्पायन बोले—जनमेजय! उस वचन का वहाँ उपस्थित समस्त राजाओं ने हृदय से सम्मान किया; पर उसके उत्तर में कोई भी आगे बढ़कर कुछ कह न सका।
वैशम्पायन उवाच