उद्योगपर्व — अध्याय ९३: कृष्णस्य धृतराष्ट्रोपदेशः
Kṛṣṇa’s Counsel to Dhṛtarāṣṭra in the Assembly
ततस्तु स्वरसम्पन्ना बहव: सूतमागधा: । शड्खदुन्दुभिनिर्घोषै: केशवं प्रत्यवोधयन्,तदनन्तर मधुर स्वरसे युता बहुत-से सूत और मागध शंख और दुन्दुभियोंके घोषसे भगवान् श्रीकृष्णको जगाने लगे
tatastu svarasampannā bahavaḥ sūtamāgadhāḥ | śaṅkhadundubhinirghoṣaiḥ keśavaṃ pratyabodhayan ||
तदनन्तर मधुर स्वर से युक्त बहुत-से सूत और मागध शंख और दुन्दुभियों के घोष से केशव को जगाने लगे।
वैशम्पायन उवाच