उद्योगपर्व — अध्याय ९३: कृष्णस्य धृतराष्ट्रोपदेशः
Kṛṣṇa’s Counsel to Dhṛtarāṣṭra in the Assembly
प्रवीरा: सर्वलोकस्य युवान: सिंहविक्रमा: । परिवार्य रथं शौरेरगच्छन्त परंतपा:,शत्रुओंको संताप देनेवाले, सिंहके समान पराक्रमी तथा सम्पूर्ण जगतके प्रख्यात तरुण वीर भगवान् श्रीकृष्णके रथको घेरकर चलते थे
vaiśampāyana uvāca | pravīrāḥ sarvalokasya yuvānaḥ siṃhavikramāḥ | parivārya rathaṃ śaurer agacchanta paraṃtapāḥ ||
समस्त लोकों में प्रसिद्ध, सिंह-सम पराक्रमी और शत्रुओं को संताप देने वाले तरुण वीर शौरी (श्रीकृष्ण) के रथ को घेरकर साथ-साथ चलते थे।
वैशम्पायन उवाच