विदुरस्य कृष्णं प्रति शमोपदेशः
Vidura’s Counsel to Krishna on the Limits of Peace
कौरवोंके चले जानेपर विदुरजीने कभी पराजित न होनेवाले दशार्हनन्दन श्रीकृष्णको समस्त मनोवांछित वस्तुएँ समर्पित करके प्रयत्नपूर्वक उनका पूजन किया ।। ततः क्षत्तान्नपानानि शुचीनि गुणवन्ति च । उपाहरदनेकानि केशवाय महात्मने
tataḥ kṣattānnapānāni śucīni guṇavanti ca | upāharad anekāni keśavāya mahātmane ||
कौरवों के चले जाने पर विदुरजी ने महात्मा केशव श्रीकृष्ण के लिए अनेक प्रकार के शुद्ध और गुणकारी अन्न-पान लाकर समर्पित किए और मनोवांछित वस्तुएँ अर्पित कर प्रयत्नपूर्वक उनका पूजन किया।
वैशम्पायन उवाच