विदुरस्य कृष्णं प्रति शमोपदेशः
Vidura’s Counsel to Krishna on the Limits of Peace
कृतार्था भुज्जते दूता: पूजां गृह्नन्ति चैव ह । कृतार्थ मां सहामात्यं समर्चिष्यसि भारत,“भारत! ऐसा नियम है कि दूत अपना प्रयोजन सिद्ध होनेपर ही भोजन और सम्मान स्वीकार करते हैं। तुम भी मेरा उद्देश्य सिद्ध हो जानेपर ही मेरा और मेरे मन्त्रियोंका सत्कार करना'
kṛtārthā bhuñjate dūtāḥ pūjāṃ gṛhṇanti caiva ha | kṛtārthaṃ māṃ sahāmātyaṃ samarcayiṣyasi bhārata ||
दूतों का नियम है कि वे अपना प्रयोजन सिद्ध होने पर ही भोजन करते और सम्मान स्वीकार करते हैं। इसलिए, हे भारत! मेरा उद्देश्य सिद्ध हो जाने पर तुम मेरे और मेरे मन्त्रियों के साथ मेरा यथोचित सत्कार करना।
वैशम्पायन उवाच