उद्योगपर्व — विदुरोक्तिः
Dhṛtarāṣṭra Addressed on Sincerity, Hospitality, and Settlement
मम पुत्राश्न पौत्राश्न सर्वे दुर्योधनादूृते । प्रत्युद्यास्यन्ति दाशाह् रथैर्मृष्टै: स््वलंकृता:,दुर्योधनके सिवा मेरे सभी पुत्र और पौत्र वस्त्र-आभूषणोंसे विभूषित हो स्वच्छ-सुन्दर रथोंपर बैठकर श्रीकृष्णकी अगवानीके लिये जायँगे
mama putrāś ca pautrāś ca sarve duryodhanād ṛte | pratyudyāsyanti dāśāḥ rathair mṛṣṭaiḥ svalankṛtāḥ ||
दुर्योधन को छोड़कर मेरे सभी पुत्र और पौत्र उत्तम वस्त्र-आभूषणों से विभूषित होकर स्वच्छ-सुन्दर रथों पर चढ़कर दाशार्ह (श्रीकृष्ण) की अगवानी के लिए निकलेंगे।
धृतराष्ट उवाच