अध्याय ८२ — केशवप्रयाणे निमित्तदर्शनम्
Omens and Reception During Keśava’s Departure
उस समय देवराज तथा दैत्यराजके भी सखा जमदग्निनन्दन परशुरामने मधुसूदन श्रीकृष्णके पास जाकर उन्हें हृदयसे लगाया और इस प्रकार कहा-- ॥। देवर्षय: पुण्यकृतो ब्राह्मणाश्व बहुश्रुता: । राजर्षयश्न दाशाह मानयन्तस्तपस्विन: । देवासुरस्य द्रष्टार: पुराणस्य महामते
“हे दाशार्ह! पुण्यकर्मा देवर्षि, बहुश्रुत ब्राह्मण और तपस्वी राजर्षि—ये सब तुम्हारा सत्कार करते हैं। हे महामते! ये देवों और असुरों के भी साक्षी हैं और प्राचीन पुराण-परंपरा के द्रष्टा हैं।”
वैशम्पायन उवाच