अध्याय ८२ — केशवप्रयाणे निमित्तदर्शनम्
Omens and Reception During Keśava’s Departure
सो<वतीर्य रथात् तूर्णमभिवाद्य जनार्दन: । यथावृत्तानृषीन् सर्वानभ्यभाषत पूजयन्,तब भगवान् श्रीकृष्ण तुरंत ही रथसे उतर पड़े और पूर्वोक्तरूपसे खड़े हुए उन समस्त महर्षियोंको प्रणाम करके उनका समादर करते हुए बोले--
so ’vatīrya rathāt tūṛṇam abhivādya janārdanaḥ | yathāvṛttān ṛṣīn sarvān abhyabhāṣata pūjayan ||
तब जनार्दन श्रीकृष्ण तुरंत रथ से उतर पड़े; पूर्ववत खड़े उन समस्त ऋषियों को प्रणाम कर, उनका सत्कार करते हुए बोले।
वैशम्पायन उवाच