अध्याय ८२ — केशवप्रयाणे निमित्तदर्शनम्
Omens and Reception During Keśava’s Departure
वैशम्पायन उवाच ततो व्यपेततमसि सूर्य विमलवदगते । मैत्रे मुहूर्ते सम्प्राप्ते मृद्रर्चिेषि दिवाकरे
Vaiśampāyana uvāca: tato vyapetatamasi sūrye vimalavadgate, maitre muhūrte samprāpte mṛdvarciṣi divākare.
वैशम्पायन बोले—तत्पश्चात् जब अन्धकार दूर हो गया, निर्मल प्रभा के साथ सूर्य उदित हुआ, और कोमल किरणों वाले दिवाकर के रहते ‘मैत्र’ मुहूर्त आ पहुँचा।
वैशम्पायन उवाच