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Shloka 44

अध्याय ८२ — केशवप्रयाणे निमित्तदर्शनम्

Omens and Reception During Keśava’s Departure

प्रत्रजन्तोडनुधावन्तीं कृपणां पुत्रगृद्धिनीम्‌ । रुदतीमपहायैनामगच्छाम वयं वनम्‌,जब हम वनको जा रहे थे, उस समय पुत्रस्नेहसे व्याकुल हो वह कातरभावसे रोती हुई हमारे पीछे-पीछे दौड़ी आ रही थी, परंतु हमलोग उसे वहीं छोड़कर वनमें चले गये

pratrajantod anudhāvantīṁ kṛpaṇāṁ putragṛddhinīm | rudatīm apahāyainām agacchāma vayaṁ vanam ||

जब हम वन को जा रहे थे, तब पुत्र-स्नेह से व्याकुल वह दीन-सी, कातर होकर रोती हुई हमारे पीछे-पीछे दौड़ी आती थी; पर हम उसे वहीं छोड़कर वन में चले गए।

प्रत्रजन्तःrunning forth / hastening
प्रत्रजन्तः:
Karta
TypeVerb
Rootप्र + त्रज् (धातु)
Formशतृ (वर्तमान कृदन्त), पुं, प्रथमा, बहुवचन
अनुधावन्तीम्running after (us)
अनुधावन्तीम्:
Karma
TypeVerb
Rootअनु + धाव् (धातु)
Formशतृ (वर्तमान कृदन्त), स्त्री, द्वितीया, एकवचन
कृपणाम्wretched, pitiable
कृपणाम्:
Karma
TypeAdjective
Rootकृपण (प्रातिपदिक)
Formस्त्री, द्वितीया, एकवचन
पुत्रगृद्धिनीम्yearning for her son
पुत्रगृद्धिनीम्:
Karma
TypeAdjective
Rootपुत्रगृद्धिनी (प्रातिपदिक)
Formस्त्री, द्वितीया, एकवचन
रुदतीम्weeping
रुदतीम्:
Karma
TypeVerb
Rootरुद् (धातु)
Formशतृ (वर्तमान कृदन्त), स्त्री, द्वितीया, एकवचन
अपहायhaving abandoned / leaving behind
अपहाय:
TypeVerb
Rootअप + हा (धातु)
Formक्त्वा (अव्ययभाव/gerund), पूर्वकाल (having done)
एनाम्her (this woman)
एनाम्:
Karma
TypeNoun
Rootएतद् (सर्वनाम-प्रातिपदिक)
Formस्त्री, द्वितीया, एकवचन
अगच्छामwe went
अगच्छाम:
TypeVerb
Rootगम् (धातु)
Formलङ् (अनद्यतन भूत), उत्तम, बहुवचन, परस्मैपद
वयम्we
वयम्:
Karta
TypeNoun
Rootअस्मद् (सर्वनाम-प्रातिपदिक)
Formप्रथमा, बहुवचन, उत्तम
वनम्to the forest
वनम्:
Karma
TypeNoun
Rootवन (प्रातिपदिक)
Formनपुं, द्वितीया, एकवचन

युधिष्ठिर उवाच

Y
Yudhiṣṭhira
A
a grieving mother (implicitly Kuntī in the exile context)
F
forest (vana)