सहदेव–सात्यकि संवादः
Sahadeva and Satyaki on resolve after failed conciliation
स भवान् कुरुमध्ये तं सान्त्वपूर्व भयोत्तरम् | ब्रूयाद् वाक््यं यथा मन्दो न व्यथेत सुयोधन:,आप कौदरवोंके बीचमें उससे पहले सान्त्वनापूर्ण बातें कहियेगा और अन्तमें युद्धका भय भी दिखाइयेगा, जिससे मूर्ख दुर्योधनके मनमें व्यथा न हो
sa bhavān kurumadhye taṃ sāntvapūrvaṃ bhayottaram | brūyād vākyaṃ yathā mando na vyatheta suyodhanaḥ ||
आप कुरुओं के बीच उससे पहले सान्त्वनापूर्ण वचन कहिए और अंत में युद्ध का भय भी दिखाइए, जिससे मंदबुद्धि सुयोधन (दुर्योधन) के मन में व्यथा न उठे।
नकुल उवाच