उद्योगपर्व — अध्याय ७७: पुरुषकार–दैवसंयोगः तथा दुष्टमन्त्रपरामर्शस्य राजनैतिक-परिणामः
Human Effort, Contingency, and the Political Effects of Corrupt Counsel
चिकीर्षितमथान्यत् ते तस्मिन् वीर दुरात्मनि । भविष्यति च तत् सर्व यथा तव चिकीर्षितम्,वीर! उस दुरात्मा दुर्योधनके प्रति आपको कुछ और करना अभीष्ट हो, तो जैसी आपकी इच्छा होगी, वह सब कार्य उसी रूपमें सम्पन्न होगा
cikīrṣitam athānyat te tasmin vīra durātmani | bhaviṣyati ca tat sarva yathā tava cikīrṣitam ||
हे वीर! उस दुरात्मा के विषय में यदि आप कुछ और करना चाहते हों, तो जैसा आपका अभिप्राय होगा, वह सब वैसा ही सम्पन्न होगा।
अर्जुन उवाच