अर्जुनोक्तिः—कृष्णं प्रति पुरुषकार‑कर्म‑विचारः
Arjuna’s Address to Krishna: Agency, Action, and Immediate Counsel
भस्न्मा रन (2) अिमसन- सप्तसप्ततितमो<्ध्याय: श्रीकृष्णका भीमसेनको आश्वासन देना श्रीभगवानुवाच भावं जिज्ञासमानोऊहं प्रणयादिदमन्रुवम् । नचाक्षेपान्न पाण्डित्यान्न क्रोधान्न विवक्षया
bhāvaṃ jijñāsamāno ’haṃ praṇayād idam abruvam | na cākṣepān na pāṇḍityān na krodhān na vivakṣayā ||
श्रीभगवान बोले—तुम्हारे मनोभाव को जानने की इच्छा से मैंने प्रेमपूर्वक ये वचन कहे हैं; न तुम्हें आक्षेप करने के लिए, न पाण्डित्य दिखाने के लिए, न क्रोधवश, और न विवाद करने या अपनी बात मनवाने की इच्छा से।
भीमसेन उवाच