Udyoga-parva Adhyāya 71 — Kṣatra-dharma Counsel, Public Legitimacy, and Mobilization
जयो नैवोभयोर्दष्टो नोभयोश्व॒ पराजय: । तथैवापचयो दृष्टो व्यपयाने क्षयव्ययौ,न तो कहीं दोनों पक्षोंकी विजय होती देखी गयी है और न दोनोंकी पराजय ही दृष्टिगोचर हुई है। हाँ, दोनोंके धन-वैभवका नाश अवश्य देखा गया है। यदि कोई पक्ष पीठ दिखाकर भाग जाय, तो उसे भी धन और जन दोनोंकी हानि उठानी पड़ती है
jayo naivobhayor dṛṣṭo nobhayoś ca parājayaḥ | tathaivāpacayo dṛṣṭo vyapayāne kṣaya-vyayau ||
न तो कहीं दोनों पक्षों की विजय देखी जाती है, न दोनों की पराजय। पर दोनों के धन-वैभव का क्षय अवश्य देखा गया है। और यदि कोई पक्ष पीठ दिखाकर भागे, तो उसे भी धन और जन—दोनों की हानि उठानी पड़ती है।
युधिछिर उवाच