Udyoga-parva Adhyāya 71 — Kṣatra-dharma Counsel, Public Legitimacy, and Mobilization
गृद्धों राजा धृतराष्ट्र: स्वधर्म नानुपश्यति । वश्यत्वात् पुत्रगृद्धित्वान्मन्दस्यान्वेति शासनम्,परंतु राजा धृतराष्ट्र तो लोभमें डूबे हुए हैं। वे अपने धर्मकी ओर नहीं देखते हैं। पुत्रोंमें आसक्त होकर सदा उन्हींके अधीन रहनेके कारण वे अपने मूर्ख पुत्र दुर्योधनकी ही आज्ञाका अनुसरण करते हैं
gṛddho rājā dhṛtarāṣṭraḥ svadharma nānupaśyati | vaśyatvāt putragṛddhitvān mandasyānveti śāsanam ||
युधिष्ठिर बोले—राजा धृतराष्ट्र लोभ में डूबे हुए हैं; वे अपने धर्म को नहीं देखते। पुत्र-मोह के वशीभूत होकर वे सदा अपने मूर्ख पुत्र दुर्योधन की आज्ञा का ही अनुसरण करते हैं।
युधिछिर उवाच