Udyoga-parva Adhyāya 69: Dhṛtarāṣṭra’s Reverential Address to Sañjaya on Vāsudeva
पूरणात् सदनाच्चापि ततो$सौ पुरुषोत्तम: | असतश्न सतश्वैव सर्वस्य प्रभवाप्ययात्
pūraṇāt sadanāccāpi tato'sau puruṣottamaḥ | asataś ca sataś caiva sarvasya prabhavāpyayāt ||
संजय बोले—पूर्णता और संहार—दोनों से परे वही पुरुषोत्तम है; क्योंकि असत् और सत्—दोनों का, और समस्त जगत् का भी, उसी से उद्भव होता है और उसी में लय होता है।
संजय उवाच