Dhṛtarāṣṭra’s Inquiry and Sañjaya’s Etymologies of Kṛṣṇa’s Names
Puruṣottama-nāma-nirvacana
संजय उवाच शृणु राजन न ते विद्या मम विद्या न हीयते । विद्याहीनस्तमो ध्वस्तो नाभिजानाति केशवम्
संजय ने कहा—राजन्! सुनिए, आपको तत्त्वज्ञान प्राप्त नहीं है और मेरी ज्ञानदृष्टि कभी क्षीण नहीं होती। जो मनुष्य तत्त्वज्ञान से रहित है और जिसकी बुद्धि अज्ञान के अंधकार से नष्ट हो चुकी है, वह केशव के वास्तविक स्वरूप को नहीं जान सकता।
संजय उवाच