Sañjaya’s Knowledge of Keśava and the Discipline of Indriya-nigraha (संजयस्य केशवज्ञानम्—इन्द्रियनिग्रह-उपदेशः)
पृथिवीं चान्तरिक्षं च द्यां चैव पुरुषोत्तम: । मनसैव विशिष्टात्मा नयत्यात्मवशं वशी,पूर्णतः स्वाधीन एवं श्रेष्ठस्वरूप पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण मनके संकल्पमात्रसे ही भूतल, अन्तरिक्ष तथा स्वर्गलोकको भी अपने अधीन कर सकते हैं
pṛthivīṃ cāntarikṣaṃ ca dyāṃ caiva puruṣottamaḥ | manasaiva viśiṣṭātmā nayatyātmavaśaṃ vaśī ||
संजय ने कहा—विशिष्ट आत्मशक्ति और पूर्ण संयम से युक्त पुरुषोत्तम (श्रीकृष्ण) मन के संकल्प मात्र से पृथ्वी, अन्तरिक्ष और स्वर्गलोक तक को अपने वश में कर लेते हैं।
संजय उवाच