Adhyaya 60: Self-Assertion, Daiva, and the Rhetoric of Inevitability (उद्योग पर्व)
इत्युक्ते संजयं भूय: पमेर्यपृच्छत भारत: । ज्ञात्वा युयुत्सो: कार्याणि प्राप्तकालमरिंदम
जनमेजय! दुर्योधन के ऐसा कहने पर, भरतनन्दन धृतराष्ट्र ने युद्ध के अभिलाषी दुर्योधन के अभिप्राय को समझकर, समयोचित बात जानने के लिए संजय से फिर प्रश्न किया।
वैशम्पायन उवाच