अर्जुन-माहात्म्य-चिन्ता
Dhṛtarāṣṭra’s Appraisal of Arjuna’s Strategic Supremacy
समर्थों बलवान् पार्थो दृढ्धन्वा जितक्लम: । भवेत् सुतुमुलं युद्ध सर्वशो5प्यपराजय:
कुन्तीपुत्र अर्जुन समर्थ और बलवान हैं; उनका धनुष अत्यन्त दृढ़ है। वे आलस्य और थकावट को जीत चुके हैं। अतः उनके साथ जो अत्यन्त घोर युद्ध छिड़ेगा, उसमें सब प्रकार से उनकी ही विजय होगी।
धृतराष्ट उवाच