Nara-Nārāyaṇa Precedent and Bhīṣma’s Counsel on Kṛṣṇa–Arjuna; Karṇa’s Reply
नोचेदयमभाव: स्यात् कुरूणां प्रत्युपस्थित: । अर्थाच्च तात धर्माच्च तव बुद्धिरुपप्लुता,यदि तुमने मेरी बात नहीं मानी तो समझ लो, कौरवोंका विनाश अवश्य ही उपस्थित हो जायगा। तात! तुम्हारी बुद्धि अर्थ और धर्म दोनोंसे भ्रष्ट हो गयी है
noced ayam abhāvaḥ syāt kurūṇāṃ pratyupasthitaḥ | arthāc ca tāta dharmāc ca tava buddhir upaplutā ||
यदि तुम मेरी बात नहीं मानोगे, तो समझ लो कि कौरवों का विनाश सामने आ खड़ा होगा। तात! तुम्हारी बुद्धि अर्थ और धर्म—दोनों से ही भ्रष्ट होकर डगमगा गई है।
वैशम्पायन उवाच