Udyoga-parva Adhyāya 47 — Arjuna’s Deterrent Declaration
Sañjaya’s Report
तथोग्रसेनस्य सुतं सुदुष्टं वृष्ण्यन्धकानां मध्यगतं सभास्थम् | अपातयदू बलदेवद्वितीयो हत्वा ददौ चोग्रसेनाय राज्यम्,“उग्रसेनका पुत्र कंस बड़ा दुष्ट था। वह जब भरी सभामें वृष्णि और अन्धकवंशी क्षत्रियोंके बीचमें बैठा हुआ था, श्रीकृष्णने बलदेवजीके साथ वहाँ जाकर उसे मार गिराया। इस प्रकार कंसका वध करके इन्होंने मथुराका राज्य उग्रसेनको दे दिया
tathograsenasya sutaṃ suduṣṭaṃ vṛṣṇyandhakānāṃ madhyagataṃ sabhāstham | apātayadū baladevadvitīyo hatvā dadau cograsenāya rājyam ||
संजय बोले—उग्रसेन का पुत्र कंस अत्यन्त दुष्ट था। वह वृष्णि और अन्धकवंशियों के बीच सभा में बैठा था; तब बलदेव सहित श्रीकृष्ण वहाँ पहुँचे और उसे मार गिराया। कंस का वध करके उन्होंने मथुरा का राज्य फिर उग्रसेन को सौंप दिया।
संजय उवाच