Udyoga-parva Adhyāya 47 — Arjuna’s Deterrent Declaration
Sañjaya’s Report
रणे हते कौरवाणां प्रवीरे शिखण्डिना सत्तमे शान्तनूजे । न जातु नः शत्रवो धारयेयु- रसंशयं सत्यमेतद् ब्रवीमि,कौरववंशके प्रमुख वीर शान्तनुनन्दन साधुशिरो-मणि भीष्मजी जब युद्धमें शिखण्डीके हाथसे मार दिये जायँगे, उस समय हमारे शत्रु कौरव कभी हमलोगोंका वेग नहीं सह सकेंगे, यह मैं सत्य कहता हूँ, इसमें तनिक भी संशय नहीं है
raṇe hate kauravāṇāṁ pravīre śikhaṇḍinā sattame śāntanūje | na jātu naḥ śatravo dhārayeyur asaṁśayaṁ satyam etad bravīmi ||
संजय बोले—जब युद्ध में कौरवों के प्रमुख वीर, शान्तनुनन्दन, साधुशिरोमणि भीष्म शिखण्डी के हाथों मारे जाएँगे, तब हमारे शत्रु कौरव कभी हमारे वेग को सह न सकेंगे। मैं यह सत्य कहता हूँ; इसमें तनिक भी संशय नहीं।
संजय उवाच