अध्याय ४६ — सभाप्रवेशः तथा सञ्जयस्य दूतवृत्तान्तः
Entry into the Royal Assembly and Sañjaya’s Envoy Report
३) (यानसंधिपर्व) सप्तचत्वारिशो< ध्याय: पाण्डवोंके यहाँसे लौटे हुए संजयका कौरवसभामें आगमन वैशम्पायन उवाच एवं सनत्सुजातेन विदुरेण च धीमता । सार्थ कथयतो राज्ञ: सा व्यतीयाय शर्वरी,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! इस प्रकार महर्षि सनत्सुजात और बुद्धिमान् विदुरजीके साथ बातचीत करते हुए राजा धृतराष्ट्रकी सारी रात बीत गयी
Vaiśampāyana uvāca: evaṃ Sanatsu-jātena Vidureṇa ca dhīmatā sārdhaṃ kathayato rājñaḥ sā vyatītā śarvarī.
वैशम्पायन बोले—हे जनमेजय! इस प्रकार महर्षि सनत्सुजात और बुद्धिमान विदुर के साथ संवाद करते-करते राजा धृतराष्ट्र की वह सारी रात्रि बीत गयी।
वैशम्पायन उवाच