Udyoga Parva, Adhyāya 40 — Vidura’s Ethical Counsel and Dhṛtarāṣṭra’s Fatalistic Turn
धृतराष्ट उवाच कि त्वं न वेद तद् भूयो यन्मे ब्रूयात् सनातन: । त्वमेव विदुर ब्रूहि प्रज्ञाशेषो5स्ति चेत् तव,धृतराष्ट्रने कहा--विदुर! क्या तुम उस तत्त्वको नहीं जानते, जिसे अब पुनः: सनातन ऋषि मुझे बतावेंगे? यदि तुम्हारी बुद्धि कुछ भी काम देती हो तो तुम्हीं मुझे उपदेश करो
dhṛtarāṣṭra uvāca | ki tvaṁ na veda tad bhūyo yan me brūyāt sanātanaḥ | tvam eva vidura brūhi prajñāśeṣo 'sti cet tava ||
धृतराष्ट्र बोले— “विदुर! क्या तुम उस तत्त्व को नहीं जानते, जिसे सनातन ऋषि फिर से मुझे बताएँगे? यदि तुम्हारे भीतर कुछ भी प्रज्ञा शेष हो, तो तुम ही मुझे उपदेश दो।”
धृतराष्ट उवाच