Vidura-nīti: Atithi-dharma, Trust, Counsel-Secrecy, and Traits of Sustainable Rule
Udyoga Parva, Adhyāya 38
येन खट्वां समारूढ: परितप्येत कर्मणा | आदावेव न तत् कुर्यादश्रुवे जीविते सति,इस जीवनका कोई ठिकाना नहीं है अतएव जिस कर्मके करनेसे (अन्तमें) खटियापर बैठकर पछताना पड़े, उसको पहलेसे ही नहीं करना चाहिये
yena khaṭvāṃ samārūḍhaḥ paritapyeta karmaṇā | ādāveva na tat kuryād aśruve jīvite sati ||
जिस कर्म के करने से अंत में खटिया पर पड़े-पड़े पछताना पड़े, उसे जीवन के अनिश्चित रहते हुए आरम्भ से ही नहीं करना चाहिए; क्योंकि इस मानव-जीवन का कोई ठिकाना नहीं है।
विदुर उवाच