Vidura-nīti: Atithi-dharma, Trust, Counsel-Secrecy, and Traits of Sustainable Rule
Udyoga Parva, Adhyāya 38
निशम्य निपुणं बुद्धया विद्वान् दूराद् विवर्जयेत् । वैसे नीच, क्रूर तथा अजितेन्द्रिय पुरुषोंसे होनेवाले संगपर अपनी बुद्धिसे पूर्ण विचार करके विद्वान् पुरुष उसे दूरसे ही त्याग दे
niśamya nipuṇaṃ buddhyā vidvān dūrād vivarjayet | vaiśe nīca-krūra tathā ajitendriya-puruṣebhyo bhavataḥ saṅgaṃ sva-buddhyā pūrṇa-vicāraṃ kṛtvā vidvān puruṣas taṃ dūrata eva tyajet ||
सूक्ष्म बुद्धि से भली-भाँति सुनकर और विचार करके विद्वान् पुरुष को चाहिए कि वह दूर से ही त्याग दे। इसी प्रकार नीच, क्रूर और अजितेन्द्रिय पुरुषों से होने वाले संग को अपनी विवेक-बुद्धि से पूर्णतः परखकर, दूर से ही छोड़ देना चाहिए।
विदुर उवाच