उद्योगपर्व — विदुरनीतिः (Adhyāya 37): आयुःक्षयहेतवः, नीतिसूत्राणि, बलभेदाः, पाण्डव-विग्रहदोषदर्शनम्
विद्याशीलवयोवृद्धान बुद्धिवृद्धांश्व भारत । धनाभिजातवृद्धांश्व नित्यं मूढोड5वमन्यते,भारत! मूर्ख मनुष्य विद्या, शील, अवस्था, बुद्धि, धन और कुलमें बड़े माननीय पुरुषोंका सदा अनादर किया करता है
vidyāśīlavayovṛddhān buddhivṛddhāṁś ca bhārata | dhanābhijātavṛddhāṁś ca nityaṁ mūḍho ’vamanyate ||
विदुर ने कहा—हे भारत! जो मनुष्य मोहग्रस्त है, वह विद्या, शील और आयु में श्रेष्ठ, तथा बुद्धि, धन और कुल में बढ़े हुए माननीय पुरुषों का नित्य तिरस्कार करता है; यही उसकी मूढ़ता और नैतिक अंधता है।
विदुर उवाच