उद्योगपर्व — विदुरनीतिः (Adhyāya 37): आयुःक्षयहेतवः, नीतिसूत्राणि, बलभेदाः, पाण्डव-विग्रहदोषदर्शनम्
भीकम (2 अमान अष्टात्रेशो5 ध्याय: विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश विदुर उवाच ऊर्ध्व प्राणा ह्ुत्क्रामन्ति यून: स्थविर आयति । प्रत्युत्थानाभिवादा भ्यां पुनस्तान् प्रतिपद्यते,विदुरजी कहते हैं--राजन्! जब कोई (माननीय) वृद्ध पुरुष निकट आता है, उस समय नवयुवक व्यक्तिके प्राण ऊपरको उठने लगते हैं; फिर जब वह वृद्धके स्वागतमें उठकर खड़ा होता और प्रणाम करता है, तब प्राणोंको पुनः वास्तविक स्थितिमें प्राप्त करता है
Vidura uvāca | ūrdhvaṁ prāṇā hy utkrāmanti yūnaḥ sthavira āyati | pratyutthānābhivādābhyāṁ punas tān pratipadyate ||
विदुर बोले—राजन्! जब कोई माननीय वृद्ध निकट आता है, तब युवक के प्राण मानो ऊपर उठने लगते हैं; पर जब वह उठकर स्वागत करता और प्रणाम करता है, तब वे प्राण फिर अपनी स्थिर अवस्था को प्राप्त हो जाते हैं।
विदुर उवाच