हंस–साध्यसंवादः, वाक्-निग्रहः, महाकुल-लक्षणम्, शान्ति-उपायः
Hamsa–Sādhya Dialogue; Restraint of Speech; Marks of Noble Lineage; Means to Peace
न तथेच्छन्ति कल्याणान् परेषां वेदितुं गुणान् यथीैषां ज्ञातुमिच्छन्ति नैर्गुण्यं पापचेतस:,जिनका मन पापोंमें लगा रहता है, वे लोग दूसरोंके कल्याणमय गुणोंको जाननेकी वैसी इच्छा नहीं रखते, जैसी कि उनके अवगुणोंको जाननेकी रखते हैं
na tathecchanti kalyāṇān pareṣāṁ vedituṁ guṇān yathaivaiṣāṁ jñātum icchanti nairguṇyaṁ pāpacetasaḥ
विदुर ने कहा—जिनका चित्त पाप में रमा रहता है, वे दूसरों के कल्याणकारी गुणों को जानने की वैसी इच्छा नहीं रखते, जैसी उनके अवगुणों को खोजने और जानने की रखते हैं।
विदुर उवाच