हंस–साध्यसंवादः, वाक्-निग्रहः, महाकुल-लक्षणम्, शान्ति-उपायः
Hamsa–Sādhya Dialogue; Restraint of Speech; Marks of Noble Lineage; Means to Peace
एतान् गुणांस्तात महानुभावा- नेको गुण: संश्रयते प्रसहा । राजा यदा सत्कुरुते मनुष्यं सर्वान् गुणानेष गुणो बिभर्ति,तात! एक गुण ऐसा है, जो इन सभी महत्त्वपूर्ण गुणोंपर हठात् अधिकार कर लेता है। राजा जिस समय किसी मनुष्यका सत्कार करता है, उस समय यह गुण (राजसम्मान) उपर्युक्त सभी गुणोंसे बढ़कर शोभा पाता है
etān guṇāṁs tāta mahānubhāvān eko guṇaḥ saṁśrayate prasahā | rājā yadā satkurute manuṣyaṁ sarvān guṇān eṣa guṇo bibharti ||
विदुर बोले—तात! इन महान गुणों में एक ऐसा गुण है, जो बलपूर्वक सबको अपने आश्रय में ले लेता है। जब राजा किसी मनुष्य का सत्कार करता है, तब वही राजसम्मान मानो सभी गुणों को धारण कर लेता है—लोक-दृष्टि में वह अन्य सब गुणों से बढ़कर चमकता है और जैसे उन्हें एकत्र कर देता है।
विदुर उवाच