Udyoga-parva Adhyāya 34 — Vidura’s Counsel on Deliberation, Speech-Discipline, and Dharmic Kingship
सामुद्रिकं वणिजं चोरपूर्व शलाकधूर्त॑ च चिकित्सकं च | अरिं च मित्र च कुशीलवं च नैतान् साक्ष्ये त्वधिकुर्वीत सप्त,हस्तरेखा देखनेवाला, चोरी करके व्यापार करनेवाला, जुआरी, वैद्य, शत्रु, मित्र और नर्तक--इन सातोंको कभी भी गवाह न बनावे
sāmudrikaṁ vaṇijaṁ corapūrvaṁ śalākadhūrtaṁ ca cikitsakaṁ ca | ariṁ ca mitraṁ ca kuśīlavaṁ ca naitān sākṣye tv adhikurvīta sapta ||
विदुर कहते हैं—साक्ष्य के प्रसंग में इन सातों को कभी गवाह न बनाए: हस्तरेखा/सामुद्रिक देखनेवाला, चोरी का पूर्ववृत्त रखने वाला व्यापारी, छल-कपट में निपुण जुआरी, वैद्य, शत्रु, मित्र और नट-नर्तक।
विदुर उवाच