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Shloka 18

Udyoga Parva, Adhyaya 31 — Yudhiṣṭhira’s Instructions to Sañjaya

Peace Appeal and Five-Village Proposal

हीनप्रज्ञो दौष्कुलेयो नृशंसो दीर्घ वैरी क्षत्रविद्यास्वधीर: । एवंधर्मानापद: संश्रयेयु- हीनवीरयों यश्न भवेदशिष्ट:

जो बुद्धिहीन, नीच कुल में उत्पन्न, क्रूर, दीर्घकाल तक वैर पालने वाले, क्षत्रियोचित युद्धविद्या में अनभिज्ञ, पराक्रमहीन और अशिष्ट होते हैं—आपत्तियाँ ऐसे ही स्वभाव के लोगों पर आ पड़ती हैं।

संजय उवाच