Udyoga-parva Adhyāya 28: Dharmādharmalakṣaṇa in Āpad
Crisis-Discernment of Right and Wrong
ऑपन-माज बक। डे: एकोनत्रिशो< ध्याय: संजयकी बातोंका प्रत्युत्तर देते हुए श्रीकृष्णका उसे धृतराष्ट्रके लिये चेतावनी देना वायुदेव उवाच अविनाशं संजय पाण्डवाना- मिच्छाम्यहं भूतिमेषां प्रियं च । तथा राज्ञो धृतराष्ट्रस्य सूत समाशंसे बहुपुत्रस्य वृद्धिम्,भगवान् श्रीकृष्णने कहा--सूत संजय! मैं जिस प्रकार पाण्डवोंको विनाशसे बचाना, उनको ऐश्वर्य दिलाना तथा उनका प्रिय करना चाहता हूँ, उसी प्रकार अनेक पुत्रोंसे युक्त राजा धृतराष्ट्रका भी अभ्युदय चाहता हूँ
vāyudeva uvāca | avināśaṃ sañjaya pāṇḍavānām icchāmy ahaṃ bhūtim eṣāṃ priyaṃ ca | tathā rājño dhṛtarāṣṭrasya sūta samāśaṃse bahuputrasya vṛddhim ||
वायुदेव बोले—हे सूत संजय! मैं पाण्डवों को विनाश से बचाना, उन्हें ऐश्वर्य देना और जो उन्हें प्रिय है उसे सिद्ध करना चाहता हूँ। उसी प्रकार अनेक पुत्रों वाले वृद्ध राजा धृतराष्ट्र के भी कल्याण और उन्नति की मैं कामना करता हूँ।
वायुदेव उवाच