Śikhaṇḍī-janma-nigūḍha-vṛtta (The concealed birth-account of Śikhaṇḍī) | शिखण्डी-जन्म-निगूढ-वृत्त
ततः सम्प्रेषषामास मित्राणाममितौजसाम् | दुहितुर्विप्रलम्भं तं धात्रीणां वचनात् तदा,तदनन्तर राजाने धायोंके कथनानुसार अपनी कन्याको द्रुपदके द्वारा धोखा दिये जानेका समाचार अमिततेजस्वी मित्र राजाओंके पास भेजा
tataḥ sampreṣayāmāsa mitrāṇām amitaujasām | duhitṛ-vipralambhaṃ taṃ dhātrīṇāṃ vacanāt tadā ||
तब धायों के कथन के अनुसार उसने अपने अमिततेजस्वी मित्र-राजाओं के पास संदेश भेजा कि द्रुपद ने उसकी कन्या को छलपूर्वक अपमानित किया है।
भीष्म उवाच