भीष्म–रामयुद्धवर्णनम्
Bhīṣma’s Account of the Strategic Engagement with Rāma Jāmadagnya
यदि शक््यो मया जेतुं जामदग्न्य: प्रतापवान् | दैवतानि प्रसन्नानि दर्शयन्तु निशां मम,यदि प्रतापी जमदग्निकुमारको जीतना मेरे लिये सम्भव हो तो प्रसन्न हुए देवगण रात्रिमें मुझे दर्शन दें
yadi śakyo mayā jetuṃ jāmadagnyaḥ pratāpavān | daivatāni prasannāni darśayantu niśāṃ mama ||
भीष्म बोले— यदि प्रतापी जामदग्न्य को जीतना मेरे लिए सम्भव हो, तो प्रसन्न हुए देवगण रात्रि में मुझे दर्शन देकर इसका संकेत दें।
भीष्म उवाच