अम्बा-शाल्वसंवादः | Amba’s Appeal to Śālva and His Refusal
अपश्यं ता महाबाहो तिस््र: कन्या: स्वलंकृता: । राज्ञश्नेव समाहूतान् पार्थिवान् पृथिवीपते
महाबाहो! वहाँ पहुँचकर मैंने वस्त्राभूषणों से सुसज्जित उन तीनों कन्याओं को देखा; और हे पृथ्वीपते! वहीं आमन्त्रित होकर आए हुए समस्त राजाओं पर भी मेरी दृष्टि पड़ी।
भीष्म उवाच