भीष्मधृतराष्ट्रसंवादः — पाण्डवबलप्रशंसा
Bhishma–Dhritarashtra Dialogue: Appraisal of Pandava Strength
एष योत्स्यति संग्रामे गजस्कन्धविशारद: | रथेन वा महाबाहु: क्षपयन् शत्रुवाहिनीम्,महाबाहु जलसंध रथ अथवा हाथीकी पीठपर बैठकर युद्ध करनेमें कुशल हैं। ये संग्राममें शत्रुसेनाका संहार करते हुए लड़ेंगे
eṣa yotsyati saṅgrāme gajaskandhaviśāradaḥ | rathena vā mahābāhuḥ kṣapayan śatravāhinīm ||
भीष्म बोले—महाबाहु जलसंध हाथी की पीठ पर बैठकर युद्ध करने में निपुण है। रथ पर हो या गजस्कन्ध पर, यह संग्राम में शत्रु-सेना का क्षय करता हुआ लड़ेगा।
भीष्म उवाच