Ulūka’s Provocation and Keśava’s Counter-Message (उलूकदूत्ये केशवप्रत्युत्तरम्)
अविज्ञानात् ततः सो5थ डिण्डिकं हुपभुक्तवान् | ततस्ते सहिता: सर्वे मन्त्रयामासुरञ्जसा,“बिलावको चूहोंकी जागरूकताका कुछ पता नहीं था। अतः वह डिंडिकको भी खा गया। तदनन्तर एक दिन सब चूहे एक साथ मिलकर आपसमें सलाह करने लगे
avijñānāt tataḥ so 'tha ḍiṇḍikaṃ hy upabhuktavān | tatas te sahitāḥ sarve mantrayāmāsur añjasā ||
संजय बोले— असावधानी के कारण वह बिलाव डिंडिक को भी खा गया। उसके बाद सब चूहे एकत्र होकर स्पष्ट उद्देश्य से आपस में विचार-विमर्श करने लगे।
संजय उवाच