कुरुक्षेत्रे सेनानिवेशवृत्तान्तः — Dhṛtarāṣṭra Questions Saṃjaya on the Deployed Armies
द्रोणान्तहेतोरुत्पन्नो य इद्धाज्जातवेदस: । वैशम्पायनजी कहते हैं-जनमेजय! तदनन्तर राजा द्रुपद, विराट, सात्यकि, पांचालराजकुमार धृष्टद्युम्न, धृष्टकेतु, पांचालवीर शिखण्डी और मगधराज सहदेव--इन सात युद्धाभिलाषी महाभाग वीरोंको युधिष्छिरने विधिपूर्वक सेनापतिके पदपर अभिषिक्त कर दिया और धृष्टद्युम्नको सम्पूर्ण सेनाओंका प्रधान सेनापति बना दिया, जो द्रोणाचार्यका अन्त करनेके लिये प्रज्वलित अग्निसे उत्पन्न हुए थे
droṇānta-hetor utpanno ya iddhāj jātavedasaḥ |
वैशम्पायन बोले—जनमेजय! जो द्रोणाचार्य के अन्त के हेतु प्रज्वलित यज्ञाग्नि से उत्पन्न हुए थे, उस धृष्टद्युम्न को युधिष्ठिर ने विधिपूर्वक अभिषिक्त करके समस्त सेनाओं का प्रधान सेनापति बनाया; और अन्य युद्धाभिलाषी महाभाग वीरों को भी सेनापति-पद पर नियुक्त किया।
वैशम्पायन उवाच