सेनापति-निर्णयः तथा पाण्डवसेनायाः कुरुक्षेत्रगमनम्
Decision on Command and the Pandavas’ March to Kurukshetra
यदा नाद्रियते वाक््यं सामपूर्व सुयोधन: । तदा मया समानीय भेदिता: सर्वपार्थिवा:,जब मैंने देखा दुर्योधन मेरे सान्त्वनापूर्ण वचनोंका पालन नहीं कर रहा है, तब मैंने सब राजाओंको बुलाकर उनमें फ़ूट डालनेका प्रयत्न किया
yadā nādriyate vākyaṃ sāmapūrvaṃ suyodhanaḥ | tadā mayā samānīya bheditāḥ sarvapārthivāḥ ||
जब मैंने देखा कि सुयोधन (दुर्योधन) मेरे सामपूर्वक कहे हुए सान्त्वनापूर्ण वचनों का आदर नहीं कर रहा, तब मैंने सब राजाओं को एकत्र करके उनमें भेद उत्पन्न करने का प्रयत्न किया, ताकि उसकी हठधर्मिता सबको एक ही विनाशकारी मार्ग पर न ले जाए।
वायुदेव उवाच