Droṇa–Vidura–Gāndhārī Counsel in the Royal Assembly (धर्मार्थयुक्ता सभा-उपदेश-प्रकरणम्)
तस्य बुद्धि: समुत्पन्ना द्वितीय: स्थात् कथं सुतः । एकपुत्रमपुत्रं वै प्रवदन््ति मनीषिण:
तब उनके मन में यह विचार उठा—“मेरा दूसरा पुत्र कैसे हो? क्योंकि मनीषीजन एक पुत्र वाले को भी वास्तव में पुत्रहीन ही कहते हैं।”
वायुदेव उवाच