Kuntī–Karṇa Saṃvāda: Lineage Disclosure and Appeal to Fraternal Dharma
स्त्रीभावाद् बालभावाच्च चिन्तयन्ती पुनः पुनः । धात्र्या विख्रब्धया गुप्ता सखीजनवृता तदा
स्त्री-स्वभाव और बाल्यावस्था के कारण मैं बार-बार उसी प्रश्न को लेकर चिन्ता में डूब जाती थी। उन दिनों एक विश्वस्त धाय मेरी रक्षा करती थी और सखियाँ मुझे सदा घेरे रहती थीं।
वैशम्पायन उवाच