उद्योगपर्व — अध्याय १४० (कृष्णेन कर्णं प्रति पाण्डवबल-वैशिष्ट्यप्रदर्शनम्) / Udyoga Parva, Chapter 140
Krishna’s appraisal of Pandava advantage and war portents
यदा द्रोणं च भीष्म॑ च पाज्चाल्यौ पातयिष्यत: । तदा यज्ञावसानं तद् भविष्यति जनार्दन,जनार्दन! जब दोनों पांचालराजकुमार धृष्टद्युम्म और शिखण्डी द्रोणाचार्य और भीष्मको मार गिरायेंगे, उस समय इस रणयज्ञका अवसान (बीच-बीचमें होनेवाला विराम) कार्य सम्पन्न होगा
हे जनार्दन! जब दोनों पाञ्चालकुमार धृष्टद्युम्न और शिखण्डी द्रोणाचार्य और भीष्म को गिरा देंगे, तब इस रण-यज्ञ का अवसान-कार्य सम्पन्न होगा।
कर्ण उवाच