कर्ण–कृष्णसंवादः (Karṇa–Kṛṣṇa-saṃvādaḥ) — Karṇa’s Statement on Lineage, Loyalty, and the ‘Śastra-yajña’ Metaphor
भुड्क्ष्व राज्यं महाबाहो भ्रातृभि: सह पाण्डवै: । जपैहेमिश्न संयुक्तो मड़लैश्व पृथग्विधै:,महाबाहो! तुम अपने भाई पाण्डवोंके साथ राज्य भोगो। जप, होम तथा नाना प्रकारके मांगलिक कर्मोमें संलग्न रहो
bhuṅkṣva rājyaṁ mahābāho bhrātṛbhiḥ saha pāṇḍavaiḥ | japaiḥ homaiś ca saṁyukto maṅgalaiś ca pṛthagvidhaiḥ ||
वायु-देव ने कहा—महाबाहो! पाण्डव भ्राताओं के साथ राज्य का भोग और पालन करो। जप और होम में सदा युक्त रहो तथा नाना प्रकार के मंगलकर्मों में प्रवृत्त रहो।
वायुदेव उवाच