Udyoga-parva Adhyāya 137 — Bhīṣma–Droṇa Counsel and the Ethics of Restraint
क्लेशिता हि त्वया पार्था धर्मपाशसितास्तदा । सभायां द्रौपदी चैव तैश्न तन्मर्षितं तव
द्यूतक्रीड़ा के समय धर्मपाश में बँधे पाण्डवों को और सभा में द्रौपदी को भी तुमने भारी क्लेश दिया था; पर उन्होंने तुम्हारे उस अपराध को सह लिया।
वैशम्पायन उवाच