Udyoga Parva Adhyāya 132 — Vidura’s Counsel on Udyama, Yaśas, and Kṣātra-Dharma
अनु त्वां तात जीवन्तु ब्राह्मणा: सुह्ृदस्तथा । पर्जन्यमिव भूतानि देवा इव शतक्रतुम्
तात! जैसे समस्त प्राणी मेघ के आश्रय से जीवित रहते हैं और जैसे सब देवता शतक्रतु इन्द्र पर आश्रित होकर जीवन धारण करते हैं, वैसे ही ब्राह्मण और हितैषी सुहृद् तेरे सहारे जीवन-निर्वाह करें।
पुत्र उवाच