Udyoga Parva Adhyāya 132 — Vidura’s Counsel on Udyama, Yaśas, and Kṣātra-Dharma
अलब्ध्वा यदि वा लब्ध्वा नानुशोचति पण्डित: । आनन्तर्य चारभते न प्राणानां धनायते
पण्डित पुरुष अभीष्ट फल मिले या न मिले, उसके लिए शोक नहीं करता। वह प्राणपर्यन्त निरन्तर प्रयत्न करता है और धन के लिए जीवन नहीं लगाता।
वायुदेव उवाच