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Shloka 35

उद्योगपर्व — गान्धारी-उपदेशः

Udyoga Parva — Gandhārī’s Counsel to Duryodhana

तत्र कार्यमहं मनन्‍्ये कालप्राप्तमरिंदमा: । क्रियमाणे भवेच्छेयस्तत्‌ सर्व शूणुतानघा:

शत्रुओं का दमन करने वाले निष्पाप कौरवो! इस विषय में मैंने समयोचित कर्तव्य का निश्चय कर लिया है; जिसका पालन करने पर सबका कल्याण होगा। वह सब मैं कहता हूँ—आप लोग सुनें।

वैशम्पायन उवाच