उद्योगपर्व — गान्धारी-उपदेशः
Udyoga Parva — Gandhārī’s Counsel to Duryodhana
यच्चैभ्यो याचमानेभ्य: पित्र्यमंशं न दित्ससि । तच्च पाप प्रदातासि भ्रष्टैश्नर्यो निपातित:
पापात्मन्! ये पाण्डव जब माँगते हैं तब तू उन्हें पैतृक भाग नहीं देना चाहता; वही भाग तुझे तब देना पड़ेगा, जब रणभूमि में गिरकर तू ऐश्वर्य से भ्रष्ट हो जाएगा।
वैशम्पायन उवाच